भूमिका

शाम के सात बज रहे हैं। बाहर हल्की-हल्की बारिश हो रही है। आप अपने ऑफिस की थकान मिटाने के लिए चाय का कप हाथ में लेकर बालकनी में बैठते हैं। अचानक, आपके फोन की प्लेलिस्ट पर ९० के दशक का एक पुराना गाना बजने लगता है—"वो कागज की कश्ती, वो बारिश का पानी..."
उसी पल, आपके सीने में एक अजीब सी कसक उठती है। एक ऐसी मीठी सी टीस, जो आपको मुस्कुराने पर भी मजबूर करती है और आपकी आँखों को थोड़ा नम भी कर देती है। आप अचानक अपने बचपन के उस घर में पहुँच जाते हैं, जहाँ बारिश होने पर आप कागज की नावें बनाया करते थे। आपको याद आता है कि कैसे आप बिना किसी फिक्र के कीचड़ में कूद जाते थे।
आपके मुंह से अचानक निकलता है—"क्या दिन थे वो भी! काश, वो वक्त वापस आ पाता।"
क्या आपके साथ भी ऐसा होता है? क्या आपको भी अक्सर ऐसा लगता है कि आपका बीता हुआ कल आज से कहीं ज्यादा खूबसूरत, आसान और खुशहाल था? चाहे वह स्कूल के दिन हों, कॉलेज की बेफिक्र दोस्ती हो, या वो पहला प्यार—अतीत (Past) हमेशा एक सुनहरे फ्रेम में मढ़ा हुआ दिखाई देता है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है? क्या सच में हमारा अतीत इतना परफेक्ट था, या यह हमारे दिमाग का कोई खूबसूरत खेल है? मनोविज्ञान (Psychology) की दुनिया में इस मीठे दर्द को Nostalgia (नॉस्टेल्जिया) कहा जाता है। आइए, आज इस लेख में हम इंसानी दिमाग की इस सबसे खूबसूरत और जटिल भावना के पीछे छिपे विज्ञान को परत-दर-परत समझते हैं।
एक छोटी सी कहानी
यह कहानी है ३२ वर्षीय रोहित की। रोहित दिल्ली की एक बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी में प्रोजेक्ट मैनेजर है। भारी-भरकम सैलरी, आलीशान फ्लैट और शहर में एक अच्छी लाइफस्टाइल होने के बाद भी रोहित अक्सर खुद को अकेला और उदास महसूस करता था। काम का दबाव, हर महीने कटने वाली होम लोन की EMI और भविष्य की चिंता ने उसे थका दिया था।
जब भी रोहित तनाव में होता, वह अपनी आँखें बंद करता और कॉलेज के दिनों को याद करने लगता। उसे याद आता कि कैसे वह और उसके तीन दोस्त—अमित, राहुल और सुमित—एक ही बाइक पर बैठकर चाय की टपरी पर घंटों बिता देते थे। जेब में केवल ५० रुपये होते थे, लेकिन हंसी ऐसी कि पेट दुखने लगे।
"वो जिंदगी भी क्या जिंदगी थी! कोई टेंशन नहीं, बस मस्ती और सच्ची दोस्ती। आज की लाइफ तो बस एक चूहा-दौड़ (Rat Race) बनकर रह गई है," रोहित अक्सर खुद से कहता।
एक दिन, दिवाली की सफाई के दौरान रोहित को स्टोर रूम में अपनी पुरानी कॉलेज की डायरी और कुछ पुराने लेटर्स मिले। वह उत्साह से भर गया और उन्हें पढ़ने बैठ गया। उसे उम्मीद थी कि इसे पढ़कर उसे वही पुरानी जादुई खुशी मिलेगी।
लेकिन जैसे ही उसने पन्ने पलटने शुरू किए, वह हैरान रह गया।
डायरी के एक पन्ने पर लिखा था: "आज फिर सेमेस्टर एग्जाम में कम मार्क्स आए। पापा बहुत नाराज हैं। पता नहीं आगे जॉब मिलेगी या नहीं। बहुत डर लग रहा है।"
दूसरे पन्ने पर लिखा था: "राहुल और मेरे बीच पैसों को लेकर बहुत गंदी लड़ाई हो गई। उसने मुझे बहुत बुरा-भला कहा। मुझे नहीं लगता कि हमारी दोस्ती अब पहले जैसी रहेगी। मैं बहुत अकेला महसूस कर रहा हूँ।"
एक और पन्ने पर उसके पहले ब्रेकअप का दर्द दर्ज था, जहाँ उसने लिखा था कि उसका दिल पूरी तरह टूट चुका है और वह रात भर सो नहीं पाया।
रोहित स्तब्ध रह गया। वह डायरी को देखता ही रह गया। वह जिन कॉलेज के दिनों को "परफेक्ट और तनावमुक्त" मान रहा था, असल में वे दिन भी गहरे तनाव, अनिश्चितता, असुरक्षा और आंसुओं से भरे हुए थे। उसका दिमाग पिछले दस सालों से उसे केवल एक एडिट की हुई (Edited) फिल्म दिखा रहा था, जिसमें से सारे विलेन और दुखद सीन काट दिए गए थे और सिर्फ खुशियों वाले सीन ही बचे थे।
रोहित के साथ जो हो रहा था, वह कोई असामान्य बात नहीं है। यह हमारे दिमाग की एक बेहद खास मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसे हम सभी हर दिन जीते हैं।
हमारे दिमाग के अंदर क्या चल रहा है?

जब हम अतीत को याद करते हैं, तो हमारा दिमाग किसी वीडियो कैमरे की तरह काम नहीं करता जो जैसी घटना घटी थी, उसे वैसे ही रिकॉर्ड कर ले। इसके बजाय, हमारा दिमाग एक 'क्रिएटिव डायरेक्टर' की तरह काम करता है। यह पुरानी यादों को लेता है, उनमें से कड़वे अनुभवों को छांटकर अलग कर देता है, और बची हुई यादों पर एक खूबसूरत 'गोल्डन फिल्टर' लगा देता है।
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, नॉस्टेल्जिया केवल एक भावना नहीं है, बल्कि यह एक जटिल मानसिक रक्षा प्रणाली (Defense Mechanism) है। जब हम वर्तमान में तनाव, अकेलेपन या अनिश्चितता से घिरे होते हैं, तो हमारा दिमाग हमें सुरक्षित महसूस कराने के लिए अतीत की शरण में ले जाता है।
आइए उन तीन मुख्य मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों (Psychology Concepts) को समझते हैं जो इस पूरी प्रक्रिया को संचालित करते हैं।
Psychology Concept 1: Rosy Retrospection (गुलाबी अतीत का भ्रम)
Rosy Retrospection वह मनोवैज्ञानिक घटना है जिसके तहत लोग अतीत की घटनाओं को उस समय की तुलना में कहीं अधिक सकारात्मक और खूबसूरत आंकते हैं, जब वे वास्तव में घटित हुई थीं। सीधे शब्दों में कहें तो, यह हमारे दिमाग द्वारा अतीत पर चढ़ाया गया एक 'गुलाबी चश्मा' है।
यह दिमाग में कैसे काम करता है?
हमारा दिमाग नकारात्मक अनुभवों की तुलना में सकारात्मक अनुभवों को अधिक समय तक सहेज कर रखना पसंद करता है। इसे मनोविज्ञान में Fading Affect Bias (FAB) कहा जाता है। समय के साथ, किसी बुरी घटना से जुड़ी नकारात्मक भावनाएं (जैसे गुस्सा, डर, या शर्म) बहुत तेजी से फीकी पड़ जाती हैं, जबकि अच्छी घटनाओं से जुड़ी सुखद भावनाएं लंबे समय तक बनी रहती हैं।
वास्तविक जीवन का उदाहरण:
मान लीजिए आप पांच साल पहले किसी ट्रिप पर गए थे। उस ट्रिप के दौरान आपकी ट्रेन छूट गई थी, होटल का कमरा बहुत गंदा था, और आपका अपने पार्टनर से झगड़ा भी हुआ था। लेकिन आज जब आप उस ट्रिप को याद करते हैं, तो आप केवल उस खूबसूरत सनसेट, पहाड़ों की ठंडी हवा और उस स्वादिष्ट भोजन को याद करते हैं। आप भूल जाते हैं कि उस वक्त आप कितने परेशान थे। यही 'रोजी रेट्रोस्पेक्ट' है।
इसके मुख्य लक्षण (Signs):
- वर्तमान की हर छोटी समस्या को देखकर यह सोचना कि "पहले के लोग और पहले का समय कितना बेहतर था।"
- अतीत के संघर्षों, बीमारियों या आर्थिक तंगियों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर देना।
- पुरानी तस्वीरों को देखकर यह महसूस करना कि आप उस वक्त पूरी तरह खुश थे, भले ही उस वक्त आप किसी गंभीर चिंता से जूझ रहे हों।
Psychology Concept 2: Emotional Memory (भावनात्मक स्मृति)
यादें केवल तथ्यों (Facts) का संग्रह नहीं होतीं; वे भावनाओं (Emotions) के धागों से बुनी होती हैं। जब कोई घटना घटती है, तो हमारे दिमाग का एक खास हिस्सा, जिसे Amygdala (अमिगडाला) कहते हैं, उस घटना को एक इमोशनल टैग दे देता है।
सरल शब्दों में स्पष्टीकरण:
हमारा दिमाग उन चीजों को कभी नहीं भूलता जो गहरी भावनाओं से जुड़ी होती हैं। जब हम नॉस्टेल्जिया महसूस करते हैं, तो हम वास्तव में किसी घटना को याद नहीं कर रहे होते, बल्कि हम उस एहसास को दोबारा जीना चाह रहे होते हैं।
दैनिक जीवन का उदाहरण:
आप किसी बेकरी के पास से गुजरते हैं और ताजी पकी हुई ब्रेड या इलायची वाली चाय की खुशबू आपके नथुनों में जाती है। तुरंत आपको अपनी नानी का घर याद आ जाता है। यहाँ खुशबू (Sensory Input) ने आपकी 'भावनात्मक स्मृति' को ट्रिगर कर दिया।
लोग इस जाल में क्यों फंसते हैं?
वर्तमान में जब हम खालीपन या भावनात्मक रूप से कमजोर महसूस करते हैं, तो हमारा दिमाग उस खालीपन को भरने के लिए पुरानी भावनात्मक स्मृतियों को सक्रिय कर देता है। हमें लगता है कि हम उस पुराने स्थान या व्यक्ति को याद कर रहे हैं, लेकिन वास्तव में हम उस 'सुरक्षा और बिना शर्त प्यार' के अहसास को तरस रहे होते हैं जो हमें उस समय मिला था।
Psychology Concept 3: Identity (पहचान और आत्म-बोध)
नॉस्टेल्जिया का सीधा संबंध इस बात से है कि हम खुद को कैसे देखते हैं। हमारी यादें ही हमारी Identity (पहचान) का निर्माण करती हैं।
अर्थ और महत्व:
जीवन लगातार बदल रहा है। हम बच्चे से वयस्क बनते हैं, नौकरियां बदलते हैं, नए शहरों में जाते हैं, और रिश्तों के टूटने-बनने के दौर से गुजरते हैं। इस लगातार बदलते संसार में, "मैं वास्तव में कौन हूँ?" का अहसास खोने का डर रहता है। नॉस्टेल्जिया यहाँ एक गोंद (Glue) की तरह काम करता है। यह हमारे अतीत के स्व (Past Self) को हमारे वर्तमान स्व (Present Self) से जोड़ता है।

भावनात्मक प्रभाव:
जब हम पुरानी यादों में जाते हैं, तो हमें अपने अस्तित्व की निरंतरता का अहसास होता है। यह हमें याद दिलाता है कि हम कभी किसी के प्रिय थे, हमने कभी सफलता हासिल की थी, और हमारे जीवन का एक मूल्य था। यह हमारी आत्म-गरिमा (Self-Esteem) को बढ़ाता है।
यह हमारे निर्णयों को कैसे प्रभावित करता है?
- मार्केटिंग और ब्रांडिंग: कंपनियां नॉस्टेल्जिया का इस्तेमाल करके अपने प्रोडक्ट बेचती हैं। ९० के दशक के विज्ञापनों की धुनें या रेट्रो पैकेजिंग देखकर हम तुरंत वह सामान खरीद लेते हैं क्योंकि वह हमें हमारी पहचान के एक सुखद हिस्से से जोड़ता है।
- रिश्ते: कई बार लोग अपनी वर्तमान पहचान के खालीपन को भरने के लिए अपने टॉक्सिक एक्स (Toxic Ex) के पास वापस चले जाते हैं, क्योंकि वह अतीत की उस परिचित पहचान का हिस्सा था।
आप इस स्थिति से गुजर रहे हैं? इसके सामान्य लक्षण (Common Signs)
यदि आप अक्सर नीचे दी गई स्थितियों को खुद में महसूस करते हैं, तो समझें कि आप नॉस्टेल्जिया और रोजी रेट्रोस्पेक्ट के गहरे प्रभाव में हैं:
- लगातार तुलना करना: आप आज के संगीत, फिल्मों, तकनीक और यहाँ तक कि लोगों की तुलना हमेशा "अपने सुनहरे दौर" से करते हैं।
- एस्केपिज्म (Escapism - पलायनवाद): जब भी वर्तमान में कोई बड़ी चुनौती या तनाव आता है, आप तुरंत पुराने गानों, पुरानी तस्वीरों या पुराने दोस्तों के ख्यालों में खो जाते हैं।
- रिश्तों में आदर्शवाद (Idealizing Past Relationships): आप अपने पुराने ब्रेकअप के दर्द को भूलकर केवल उस रिश्ते के अच्छे पलों को याद करते हैं और सोचते हैं कि वैसा प्यार कभी दोबारा नहीं मिल सकता।
- अत्यधिक उदासी के साथ खुशी (Bittersweet Feeling): पुरानी यादों को याद करते हुए आपकी आँखों में आंसू आ जाते हैं, लेकिन साथ ही चेहरे पर एक हल्की मुस्कान भी होती है।
- बदलाव से डर लगना: आप जीवन में होने वाले नए बदलावों (जैसे नई तकनीक, नए लोगों, या नए माहौल) को स्वीकार करने में कठिनाई महसूस करते हैं क्योंकि आप अतीत के कम्फर्ट जोन में बंधे रहना चाहते हैं।
हमारा दिमाग ऐसा क्यों करता है? (Why Our Brain Does This)
यह जानना बेहद दिलचस्प है कि हमारा दिमाग आखिर इस तरह की काल्पनिक दुनिया क्यों रचता है। इसके पीछे कुछ गहरे जैविक और मनोवैज्ञानिक कारण हैं:
१. अनिश्चितता का डर (Fear of Uncertainty)
भविष्य हमेशा अनिश्चित और डरावना होता है। हमें नहीं पता कि कल क्या होगा। लेकिन अतीत के साथ ऐसा नहीं है। अतीत की कहानी पूरी हो चुकी है, हमें उसका अंत (Climax) पता है। चूँकि अतीत में कोई अनिश्चितता नहीं होती, इसलिए हमारा दिमाग इसे एक 'सुरक्षित ठिकाना' (Safe Haven) मानता है।
२. डोपामाइन का स्राव (Dopamine Release)
जब हम किसी बेहद सुखद याद को याद करते हैं, तो हमारा दिमाग Dopamine (डोपामाइन) नामक न्यूरोट्रांसमीटर रिलीज करता है, जिसे 'फील-गुड हार्मोन' भी कहा जाता है। यह वही केमिकल है जो हमें तब मिलता है जब हम कोई स्वादिष्ट खाना खाते हैं या सोशल मीडिया पर लाइक्स पाते हैं। हमारा दिमाग इस सुखद अहसास को बार-बार पाना चाहता है।
३. भावनात्मक संतुलन बनाए रखना (Homeostasis)
जब हम अकेलेपन, अवसाद या निराशा से घिरे होते हैं, तो हमारा मानसिक संतुलन बिगड़ने लगता है। ऐसे में नॉस्टेल्जिया एक प्राकृतिक मरहम की तरह काम करता है। यह हमारे भीतर आशा और सकारात्मकता का संचार करता है ताकि हम वर्तमान के संकट का सामना कर सकें।
इस Situation को कैसे Handle करें?
नॉस्टेल्जिया एक खूबसूरत अहसास है, लेकिन जब यह एक लत (Addiction) बन जाता है, तो यह हमें वर्तमान में जीने से रोकने लगता है। हम 'अतीत के कैदी' बनकर रह जाते हैं। इस स्थिति को संतुलित करने के लिए आप निम्नलिखित व्यावहारिक कदम उठा सकते हैं:
१. 'रियलिटी चेक' (Reality Check) अपनाएं
जब भी आपका दिमाग आपको यह विश्वास दिलाने की कोशिश करे कि आपका अतीत एकदम परफेक्ट था, तो रुकें और खुद से पूछें—"क्या सच में सब कुछ उतना ही आसान था?"
रोहित की तरह, अपने अतीत की उन चुनौतियों, आंसुओं और संघर्षों को भी याद करें जिन्हें आपके दिमाग ने फिल्टर कर दिया है। यह आपको वर्तमान की वास्तविकता में वापस लाएगा।
२. माइंडफुलनेस (Mindfulness) का अभ्यास करें
अतीत में रहने का सीधा मतलब है कि आप वर्तमान से भाग रहे हैं। आज के क्षण में जीना सीखें। * हर दिन कम से कम १० मिनट ध्यान (Meditation) करें। * अपनी पांचों ज्ञानेंद्रियों (Senses) पर ध्यान केंद्रित करें—आप इस वक्त क्या देख रहे हैं, क्या सुन रहे हैं, और क्या महसूस कर रहे हैं।
३. आभार सूची (Gratitude Journaling) बनाएं
हम अक्सर वर्तमान की अच्छाइयों को नजरअंदाज कर देते हैं क्योंकि हमारा ध्यान अतीत की खोई हुई चीजों पर होता है। * रोज रात को सोने से पहले उन ३ चीजों के नाम लिखें जो आज आपके जीवन में अच्छी रहीं। * यह आपके दिमाग को आज की खुशियों को देखने और उन्हें महत्व देने के लिए ट्रेन करेगा।

४. नए अनुभव और यादें बनाएं (Create New Memories)
यदि आप आज कुछ नया और रोमांचक नहीं कर रहे हैं, तो आपका दिमाग स्वाभाविक रूप से पुरानी यादों को ही चबाता रहेगा। * कोई नया शौक (Hobby) अपनाएं, जैसे पेंटिंग, गिटार बजाना या कोई नई भाषा सीखना। * नए लोगों से मिलें, यात्राएं करें। याद रखें, आज का दिन भी आने वाले कल का "सुनहरा अतीत" बनने वाला है।
५. नॉस्टेल्जिया को प्रेरणा बनाएं, पलायन नहीं
पुरानी यादों का इस्तेमाल खुद को उदास करने के लिए नहीं, बल्कि खुद को प्रेरित करने के लिए करें। अगर आपको याद आता है कि आप कॉलेज में कितने आत्मविश्वासी थे, तो उस आत्मविश्वास को आज अपने ऑफिस के काम में इस्तेमाल करें।
इस मनोविज्ञान से मिलने वाले जीवन के सबक
अतीत का यह मनोविज्ञान हमें जीवन के तीन बेहद अनमोल सबक सिखाता है:
- अतीत एक संदर्भ बिंदु (Reference Point) है, निवास स्थान (Residence) नहीं: हमें अतीत से सीखना चाहिए, उसकी यादों का आनंद लेना चाहिए, लेकिन हमें वहाँ रहने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। जीवन केवल 'आगे' बहने का नाम है।
- आज का दिन कल का 'गोल्डन एरा' है: आज आप जिस नौकरी, जिस घर या जिन परिस्थितियों से परेशान हो रहे हैं, संभव है कि आज से १० साल बाद आप इन्हीं दिनों को याद करके कहेंगे—"वो दिन भी क्या दिन थे!" इसलिए, आज की कद्र करना सीखें।
- परिवर्तन ही शाश्वत नियम है: बदलाव से डरें नहीं। हमारी पहचान समय के साथ विकसित होती है। पुराने स्व को पीछे छोड़कर नए स्व को अपनाना ही मानसिक परिपक्वता (Mental Maturity) है।
Frequently Asked Questions (FAQ)
Q1. क्या नॉस्टेल्जिया (Nostalgia) महसूस करना एक बीमारी या मानसिक विकार है?
उत्तर: बिल्कुल नहीं। नॉस्टेल्जिया पूरी तरह से सामान्य और स्वस्थ मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है। यह हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है क्योंकि यह तनाव कम करता है और सामाजिक जुड़ाव की भावना को बढ़ाता है। हालांकि, अगर कोई व्यक्ति वर्तमान को पूरी तरह से नकार कर केवल अतीत के ख्यालों में ही खोया रहता है, तो यह डिप्रेशन या एंग्जायटी का संकेत हो सकता है।
Q2. हम हमेशा अपने पुराने प्यार (Ex) को क्यों याद करते हैं, भले ही वह रिश्ता कितना भी बुरा क्यों न रहा हो?
उत्तर: इसका कारण 'Rosy Retrospection' और 'Emotional Memory' है। समय के साथ, आपका दिमाग उस रिश्ते की लड़ाइयों, अपमान और आंसुओं को भुला देता है और केवल उन खूबसूरत मुलाकातों, तोहफों और शुरुआत के रोमांच को याद रखता है। आपका दिमाग उस व्यक्ति को नहीं, बल्कि उस समय महसूस होने वाले 'प्यार और सुरक्षा के अहसास' को याद करता है।
Q3. जब भी मैं उदास होता हूँ, मुझे पुराने गाने सुनना क्यों पसंद आता है?
उत्तर: पुराने गाने हमारे दिमाग में 'इमोशनल एंकर' की तरह काम करते हैं। जब आप कोई ऐसा गाना सुनते हैं जो आपने अपने जीवन के किसी खुशहाल दौर में सुना था, तो आपका दिमाग तुरंत उस समय की सकारात्मक भावनाओं को सक्रिय कर देता है और डोपामाइन रिलीज करता है, जिससे आपको तुरंत राहत और खुशी महसूस होती है।
Q4. क्या बहुत ज्यादा यादों में खोए रहना मेरे वर्तमान जीवन को प्रभावित कर सकता है?
उत्तर: हाँ। इसे 'Maladaptive Nostalgia' कहा जाता है। यदि आप लगातार अतीत में जीते रहेंगे, तो आप वर्तमान के अवसरों को खो देंगे, अपने मौजूदा रिश्तों पर ध्यान नहीं दे पाएंगे और हमेशा असंतुष्ट महसूस करेंगे। यह आपकी निर्णय लेने की क्षमता और व्यक्तिगत विकास को बाधित कर सकता है।
Q5. मैं अपने दिमाग को वर्तमान क्षण (Present Moment) में जीने के लिए कैसे प्रशिक्षित करूँ?
उत्तर: इसके लिए '5-4-3-2-1 ग्राउंडिंग तकनीक' का उपयोग करें। जब भी आपका दिमाग अतीत में भटके, अपने आस-पास की: * ५ चीजें देखें जिन्हें आप देख सकते हैं। * ४ चीजें जिन्हें आप छू सकते हैं। * ३ चीजें जिन्हें आप सुन सकते हैं। * २ चीजें जिन्हें आप सूंघ सकते हैं। * १ चीज जिसे आप चख सकते हैं। यह तकनीक आपके दिमाग को तुरंत काल्पनिक अतीत से खींचकर वर्तमान की वास्तविकता में स्थापित कर देती है।
निष्कर्ष
अतीत की यादों की अपनी एक अलग ही खुशबू होती है। यह खुशबू कभी हमें हंसाती है, तो कभी हमारी पलकों को भारी कर देती है। नॉस्टेल्जिया वास्तव में हमारे दिमाग का एक खूबसूरत उपहार है, जो हमें यह याद दिलाता है कि हमारा सफर कितना खूबसूरत रहा है और हमने कितनी मुश्किलों को पार किया है।
लेकिन याद रखिए, अतीत एक खूबसूरत एल्बम की तरह है—इसे कभी-कभार खोलकर देखना और मुस्कुराना बहुत अच्छा है। लेकिन इस एल्बम के भीतर जाकर रहने की जिद करना समझदारी नहीं है।
आज की यह धूप, यह चाय की प्याली, यह बारिश और आपके पास मौजूद ये लोग—ये सब भी बहुत जल्द एक याद बन जाने वाले हैं। इससे पहले कि आपका दिमाग आज के इस खूबसूरत दिन को भी एक 'एडिटेड' और 'गुलाबी' याद में बदल दे, इसे पूरे दिल से जी लीजिए।
उठिए, अपनी चाय की आखिरी चुस्की लीजिए, और आज के इस पल
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